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आँखें ग़ज़ाल हिरनी हैं ज़ुल्फ़ घटा सावन पर्वत पे रक़्साँ कोई बादल लगती हो

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नज़र घुमा के कभी देख ले घड़ी की तरफ़ बहुत समय से कोई तेरे इंतिज़ार में है

ALI ZUHRI

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आप के तोड़े हुए फूल या छोड़े हुए लोग एक ही क़िस्म की बर्बादी यहाँ पाएँगे पहले पहले तो लुभाएँगे तुम्हें ख़ुशबू से धीरे धीरे वो किताबों में बिखर जाएँगे

ALI ZUHRI

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जो मेरे नाम से मंसूब कर के तोड़े थे वो फूल अब भी रखे हैं तेरी किताब में क्या मुझे यूँँ वहशतों की मौत मारने वाले बचा हुआ है मेरा अक्स तेरे ख़्वाब में क्या

ALI ZUHRI

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तुम जो दीवानों को आवारा बता देते हो तुम तो मेआ'र मोहब्बत का गिरा देते हो तुम को आता है नए लोगों में घुलना मिलना बा'द हिजरत के नया शहर बसा देते हो

ALI ZUHRI

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मोहब्बत आबगीनों में हसीनों नाज़नीनों में बड़ी वहशत सी होती है दिलों के इन मकीनों में

ALI ZUHRI

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