जो मेरे नाम से मंसूब कर के तोड़े थे वो फूल अब भी रखे हैं तेरी किताब में क्या मुझे यूँँ वहशतों की मौत मारने वाले बचा हुआ है मेरा अक्स तेरे ख़्वाब में क्या
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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कोई शहर था जिस की एक गली मेरी हर आहट पहचानती थी मेरे नाम का इक दरवाज़ा था इक खिड़की मुझ को जानती थी
Ali Zaryoun
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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नज़र घुमा के कभी देख ले घड़ी की तरफ़ बहुत समय से कोई तेरे इंतिज़ार में है
ALI ZUHRI
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कुछ इस तरह तेरी यादों में डूबता है दिल वो जैसे शाम को मग़रिब में डूबता है शम्स
ALI ZUHRI
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तुम एक शख़्स पे जीवन बिताते हो हद है किसी के प्यार में ख़ुद को भुलाते हो हद है तुम्हारी राह से कंकर चुने थे मैंनें दोस्त मुझे ही राह का पत्थर बताते हो हद है
ALI ZUHRI
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देख कर हुस्न तिरा चाँद बहक जाता है लड़खड़ाता हुआ अंबर से ढलक जाता है
ALI ZUHRI
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दो पल की दिल-लगी रही दो पल रहा सफ़र अब हिस्से रह गया है तेरा हिज्र उम्र भर मैं चाहता था चलना तेरे साथ बा-क़दम पर खा गया ज़माने की रुस्वाइयों का डर
ALI ZUHRI
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