देख कर हुस्न तिरा चाँद बहक जाता है लड़खड़ाता हुआ अंबर से ढलक जाता है
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देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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मुद्दतों बा'द इक शख़्स से मिलने के लिए आइना देखा गया, बाल सँवारे गए
Jaun Elia
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रातें किसी याद में कटती हैं और दिन दफ़्तर खा जाता है दिल जीने पर माएल होता है तो मौत का डर खा जाता है सच पूछो तो 'तहज़ीब हाफ़ी' मैं ऐसे दोस्त से आज़िज़ हूँ मिलता है तो बात नहीं करता और फोन पे सर खा जाता है
Tehzeeb Hafi
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मेरी तन्हाई देखेंगे तो हैरत ही करेंगे लोग मोहब्बत छोड़ देंगे या मोहब्बत ही करेंगे लोग
Ismail Raaz
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जो मेरे नाम से मंसूब कर के तोड़े थे वो फूल अब भी रखे हैं तेरी किताब में क्या मुझे यूँँ वहशतों की मौत मारने वाले बचा हुआ है मेरा अक्स तेरे ख़्वाब में क्या
ALI ZUHRI
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बाग़ों से पीले फूलों की रंगत चुराएगी फिर अपने सुर्ख़ होंटों पे तितली बिठाएगी ग़ुस्से में देख कर उसे महसूस ये हुआ हिंदा के जैसे मेरा कलेजा चबाएगी
ALI ZUHRI
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बा'द तेरे तो क्या करेंगे हम हिज्र का हक़ अदा करेंगे हम फूल बन जाएँगे महकने को तितलियों से वफा करेंगे हम
ALI ZUHRI
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कभी इस से कभी उस से मुझे सब से मोहब्बत हो नहीं मैं वो नहीं हूँ जो सभी के साथ हो जाए
ALI ZUHRI
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कितनी कड़वी हैं बातें भी इस दुनिया की यारों अब ज़िंदगी मेरी ही मुझ को तल्ख़-नवा लगती है
ALI ZUHRI
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