sherKuch Alfaaz

देख कर हुस्न तिरा चाँद बहक जाता है लड़खड़ाता हुआ अंबर से ढलक जाता है

ALI ZUHRI2 Likes

More from ALI ZUHRI

जो मेरे नाम से मंसूब कर के तोड़े थे वो फूल अब भी रखे हैं तेरी किताब में क्या मुझे यूँँ वहशतों की मौत मारने वाले बचा हुआ है मेरा अक्स तेरे ख़्वाब में क्या

ALI ZUHRI

1 likes

बाग़ों से पीले फूलों की रंगत चुराएगी फिर अपने सुर्ख़ होंटों पे तितली बिठाएगी ग़ुस्से में देख कर उसे महसूस ये हुआ हिंदा के जैसे मेरा कलेजा चबाएगी

ALI ZUHRI

2 likes

बा'द तेरे तो क्या करेंगे हम हिज्र का हक़ अदा करेंगे हम फूल बन जाएँगे महकने को तितलियों से वफा करेंगे हम

ALI ZUHRI

3 likes

कभी इस से कभी उस से मुझे सब से मोहब्बत हो नहीं मैं वो नहीं हूँ जो सभी के साथ हो जाए

ALI ZUHRI

5 likes

कितनी कड़वी हैं बातें भी इस दुनिया की यारों अब ज़िंदगी मेरी ही मुझ को तल्ख़-नवा लगती है

ALI ZUHRI

8 likes

Similar Writers

View All ›

Our suggestions based on ALI ZUHRI.

Similar Moods

View All ›

More moods that pair well with ALI ZUHRI's sher.