कितनी कड़वी हैं बातें भी इस दुनिया की यारों अब ज़िंदगी मेरी ही मुझ को तल्ख़-नवा लगती है
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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बड़े नादान हो तुम भी ज़रा समझा करो बातें गले मिल कर जो रोती है बिछड़ कर कितना रोएगी
Ankita Singh
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नज़र घुमा के कभी देख ले घड़ी की तरफ़ बहुत समय से कोई तेरे इंतिज़ार में है
ALI ZUHRI
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बाग़ों से पीले फूलों की रंगत चुराएगी फिर अपने सुर्ख़ होंटों पे तितली बिठाएगी ग़ुस्से में देख कर उसे महसूस ये हुआ हिंदा के जैसे मेरा कलेजा चबाएगी
ALI ZUHRI
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रेत ही रेत मिली इश्क़ सफ़र में मुझ को ज़िंदगी ख़ाक हुई और मिला कुछ भी नहीं रात भर होता है तारी किसी वहशत का गुमाँ रात ख़्वाबों की सियाहत के सिवा कुछ भी नहीं
ALI ZUHRI
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मोहब्बत आबगीनों में हसीनों नाज़नीनों में बड़ी वहशत सी होती है दिलों के इन मकीनों में
ALI ZUHRI
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मेरी तमाम ज़िंदगी बर्बाद कर के अब मसरूफ़ होगी ईद कि तय्यारियों में वो
ALI ZUHRI
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