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मोहब्बत आबगीनों में हसीनों नाज़नीनों में बड़ी वहशत सी होती है दिलों के इन मकीनों में

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आप के तोड़े हुए फूल या छोड़े हुए लोग एक ही क़िस्म की बर्बादी यहाँ पाएँगे पहले पहले तो लुभाएँगे तुम्हें ख़ुशबू से धीरे धीरे वो किताबों में बिखर जाएँगे

ALI ZUHRI

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तुम जो दीवानों को आवारा बता देते हो तुम तो मेआ'र मोहब्बत का गिरा देते हो तुम को आता है नए लोगों में घुलना मिलना बा'द हिजरत के नया शहर बसा देते हो

ALI ZUHRI

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कुछ इस तरह तेरी यादों में डूबता है दिल वो जैसे शाम को मग़रिब में डूबता है शम्स

ALI ZUHRI

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कभी इस से कभी उस से मुझे सब से मोहब्बत हो नहीं मैं वो नहीं हूँ जो सभी के साथ हो जाए

ALI ZUHRI

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दो पल की दिल-लगी रही दो पल रहा सफ़र अब हिस्से रह गया है तेरा हिज्र उम्र भर मैं चाहता था चलना तेरे साथ बा-क़दम पर खा गया ज़माने की रुस्वाइयों का डर

ALI ZUHRI

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