कुछ इस तरह तेरी यादों में डूबता है दिल वो जैसे शाम को मग़रिब में डूबता है शम्स
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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ये फ़िल्मों में ही सब को प्यार मिल जाता है आख़िर में मगर सचमुच में इस दुनिया में ऐसा कुछ नहीं होता चलो माना कि मेरा दिल मेरे महबूब का घर है पर उस के पीछे उस के घर में क्या-क्या कुछ नहीं होता
Tehzeeb Hafi
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चाँदी सोना एक तरफ़ तेरा होना एक तरफ़ एक तरफ़ तेरी आँखें जादू टोना एक तरफ़
Gyan Prakash Akul
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नज़र घुमा के कभी देख ले घड़ी की तरफ़ बहुत समय से कोई तेरे इंतिज़ार में है
ALI ZUHRI
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जो मेरे नाम से मंसूब कर के तोड़े थे वो फूल अब भी रखे हैं तेरी किताब में क्या मुझे यूँँ वहशतों की मौत मारने वाले बचा हुआ है मेरा अक्स तेरे ख़्वाब में क्या
ALI ZUHRI
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तुम्हारी मौत का दुख होता तो सहन होता तुम्हारे हिज्र का दुख कैसे सह सकूँगा मैं
ALI ZUHRI
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बाग़ों से पीले फूलों की रंगत चुराएगी फिर अपने सुर्ख़ होंटों पे तितली बिठाएगी ग़ुस्से में देख कर उसे महसूस ये हुआ हिंदा के जैसे मेरा कलेजा चबाएगी
ALI ZUHRI
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उसे बनाया गया था बहुत हसीन जमील मैं उस सेे इश्क़ न करता तो और क्या करता
ALI ZUHRI
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