आँखों से तेरे ख़्वाब के मंज़र निकाल के हम सर्दियों में बैठे हैं चादर निकाल के जब तू ही देखने को मुयस्सर नहीं हमें आँखों को रख न दें कहीं बाहर निकाल के
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हम को दिल से भी निकाला गया फिर शहर से भी हम को पत्थर से भी मारा गया फिर ज़हरस भी
Azm Shakri
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तुम्हारी आँखों की तौहीन है ज़रा सोचो तुम्हारा चाहने वाला शराब पीता है
Munawwar Rana
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निकाल लाया हूँ एक पिंजरे से इक परिंदा अब इस परिंदे के दिल से पिंजरा निकालना है
Umair Najmi
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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हम ने उस को इतना देखा जितना देखा जा सकता था लेकिन फिर भी दो आँखों से कितना देखा जा सकता था
Farrukh Yar
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इश्क़ अधूरा मौत की नींद सुलाता है शुक्र मनाओ तुम को ज़िन्दा छोड़ दिया
Shahzan Khan Shahzan'
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रहना पड़ता है उदासी के नगर में हम को तब कहीं जाके ये अश'आर हुआ करते हैं
Shahzan Khan Shahzan'
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ठहर गया हूँ मुहब्बत के उस क़बीले में जहाँ से मुझ को बहुत जल्द लौट जाना था
Shahzan Khan Shahzan'
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आँखों से तेरे ख़्वाब के मंज़र निकाल के हम सर्दियों में बैठे हैं चादर निकाल के जब तू ही देखने को मुयस्सर नहीं हमें आँखों को रख न दें कहीं बाहर निकाल के
Shahzan Khan Shahzan'
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तू वापस लौट कर आए न आए ये दरिया हर समय बहता मिलेगा
Shahzan Khan Shahzan'
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