आँखों में तू सैलाब आने दे आज उस प्रेयसी को भी भुलाने दे आज सब सेे तबीअत से मिलूँगा ऐ दोस्त थोड़ी ख़ुशी उन को मनाने दे आज
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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साँस लेने के भी पैसे देने होंगे इस क़दर महँगाई बढ़ती जा रही है
Shubham Rai 'shubh'
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ये लोग पूछेंगे हमें ज़रा ख़राब होने दो अधर से चूम लेंगे बस मियाँ शराब होने दो
Shubham Rai 'shubh'
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तजरबा बस तुम्हें है जीने का हम ने तो ज़िंदगी गँवाई है दस्त के आप ही मुसाफ़िर हो ख़ाक हम ने कहाँ उड़ाई है
Shubham Rai 'shubh'
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मेरे हक़ में वो इबादत भी करती है मुझ सेे वो बेहद मोहब्बत भी करती है जो कभी ऑफ़िस से हम लौटे देर से तो वो चौखट पर शरारत भी करती है
Shubham Rai 'shubh'
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जो लगेगा मौक़ा तो पूछेंगे हम इश्क़ ये मरहम है तो किस के लिए
Shubham Rai 'shubh'
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