आँसू हो तेरे पास तो तू भी ख़रीद ला ग़म की दुकाँ में बिकती है ख़ुशियाँ बड़ी बड़ी
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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वो अब मेरा नहीं ये मानना आसाँ यूँँ हो जाए बराबर एक्स के कुछ मान लेना जितना आसाँ था
SHIV SAFAR
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साथ इक दूजे के हम होते जनाब पास फिर इतने न ग़म होते जनाब मुझ सेे ही होती समुंदर में नमी दुख जो रो लेने से कम होते जनाब
SHIV SAFAR
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सुना है बा'द मरने के सभी अच्छा बताते हैं मुझे भी सबके होंठों से मेरी ता'रीफ़ सुननी है
SHIV SAFAR
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रोज़ माँगू दु'आओं में उन को मगर अब कोई यत्न भी काम आते नहीं प्रेम की माला पर कितना सिमरूॅं उन्हें इस अयोध्या के अब राम आते नहीं
SHIV SAFAR
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मैं सरकार की नाकामी पर उँगली नहीं उठाऊँगा आख़िर इक सरकारी नौकर के कारण मैं शाइ'र हूँ
SHIV SAFAR
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