sherKuch Alfaaz

आप जिस चीज़ को कहते हैं कि बेहोशी है वो दिमाग़ों में ज़रा देर की ख़ामोशी है सूखते पेड़ से पंछी का जुदा हो जाना ख़ुद-परस्ती नहीं एहसान-फ़रामोशी है

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कुछ वक़्त ने तोड़ा है भरम और कुछ उस ने मैं तो ये समझता था कोई बात है मुझ में

Ashu Mishra

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साथ में तू मेरे दो गाम तो चल सकता है इतना चलने से मेरा काम तो चल सकता है तेरे दिल में किसी शाइ'र की जगह तो होगी इस इलाके में मेरा नाम तो चल सकता है

Ashu Mishra

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और अब दुनिया मेरी तन्हाई में देती है दख़्ल मैं भी पत्थर फेंकता रहता था ठहरी झील पर

Ashu Mishra

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अवल्ली इश्क़ के एहसास भी तारी रक्खे और इस बीच नए काम भी जारी रक्खे मैं ने दिल रख लिया है ये भी कोई कम तो नहीं दूसरा ढूँढ़ लो जो बात तुम्हारी रक्खे

Ashu Mishra

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ग़म में हम सूरत-ए-गमख़ार नहीं पढ़ते हैं इस लिए मीर के अश'आर नहीं पढ़ते हैं मेरी आँखें तेरी तस्वीर से जा लगती हैं सुब्ह उठकर सभी अख़बार नहीं पढ़ते हैं

Ashu Mishra

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