आप के लब पे और वफ़ा की क़सम क्या क़सम खाई है ख़ुदा की क़सम
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था
Tehzeeb Hafi
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सौ बार जिस को देख के हैरान हो चुके जी चाहता है फिर उसे इक बार देखना
Saba Akbarabadi
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इक रोज़ छीन लेगी हमीं से ज़मीं हमें छीनेंगे क्या ज़मीं के ख़ज़ाने ज़मीं से हम
Saba Akbarabadi
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भीड़ तन्हाइयों का मेला है आदमी आदमी अकेला है
Saba Akbarabadi
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ग़लत-फ़हमियों में जवानी गुज़ारी कभी वो न समझे कभी हम न समझे
Saba Akbarabadi
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आप के लब पे और वफ़ा की क़सम क्या क़सम खाई है ख़ुदा की क़सम
Saba Akbarabadi
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