आप क्यूँँ रोएँगे मेरी ख़ातिर फ़र्ज़ ये सारे इस ग़ुलाम के हैं दिन में सौ बार याद करता हूँ पासवर्ड सारे तेरे नाम के हैं
Related Sher
लोग हर मोड़ पे रुक रुक के सँभलते क्यूँँ हैं इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यूँँ हैं मोड़ होता है जवानी का सँभलने के लिए और सब लोग यहीं आ के फिसलते क्यूँँ हैं
Rahat Indori
133 likes
कोई शहर था जिस की एक गली मेरी हर आहट पहचानती थी मेरे नाम का इक दरवाज़ा था इक खिड़की मुझ को जानती थी
Ali Zaryoun
321 likes
ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है क्यूँँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम
Sahir Ludhianvi
174 likes
गले तो लगना है उस से कहो अभी लग जाए यही न हो मेरा उस के बग़ैर जी लग जाए मैं आ रहा हूँ तेरे पास ये न हो कि कहीं तेरा मज़ाक़ हो और मेरी ज़िंदगी लग जाए
Tehzeeb Hafi
267 likes
प्यार मेरी कमज़ोरी थी और उस ने मुझे जी भर कर कमज़ोर किया फिर छोड़ दिया
Varun Anand
73 likes
More from Aadil Rasheed
एक आवाज़ पे आ जाती है दौड़ी दौड़ी दश्त-ओ-सहरा-ओ-बयाबान नहीं देखती है दोस्ती दोस्ती होती है तुम्हें इल्म नहीं दोस्ती फ़ाइदा नुक़सान नहीं देखती है
Aadil Rasheed
51 likes
उस की हर इक याद में लज़्ज़त होती है पहली मोहब्बत पहली मोहब्बत होती है तेरे साथ नहीं हैं तो एहसास हुआ इक तस्वीर की कितनी क़ीमत होती है
Aadil Rasheed
55 likes
हलाल रिज़्क़ का मतलब किसान से पूछो पसीना बन के बदन से लहू निकलता है
Aadil Rasheed
33 likes
ज़िंदगी भर के लिए दिल पे निशानी पड़ जाए बात ऐसी न लिखो, लिख के मिटानी पड़ जाए
Aadil Rasheed
100 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Aadil Rasheed.
Similar Moods
More moods that pair well with Aadil Rasheed's sher.







