आप की कोई निशानी भी नहीं है कम हमारी ज़िंदगानी भी नहीं है कोई समझे काश दरिया की उदासी शांत रहता है रवानी भी नहीं है आग बढ़ती जा रही है दिल मकाँ में देखना है बस बुझानी भी नहीं है बात मैं ने माननी दिल की नहीं है अब मुझे अपनी चलानी भी नहीं है
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
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तेरी यादों से भर जाती हैं आँखें मगर ये मन नहीं भरता हमारा
AKASH
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लड़की है वो उस घर की जो मरते हैं दस्तार की ख़ातिर
AKASH
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समुंदर जैसी आँखें उस की देखीं जब हमें क्यूँ दी है बीनाई समझ आई
AKASH
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सब्ज़ रहता है पानी के बिन कुछ दिनों पेड़ इक दम से तो सूख जाता नहीं
AKASH
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बस उस पे मरते जाना है मुझ को ये करते जाना है
AKASH
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