सब्ज़ रहता है पानी के बिन कुछ दिनों पेड़ इक दम से तो सूख जाता नहीं
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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वक़्त रहता नहीं कहीं टिक कर आदत इस की भी आदमी सी है
Gulzar
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कोई हसीन बदन जिन की दस्तरस में नहीं यही कहेंगे कि कुछ फ़ाएदा हवस में नहीं
Umair Najmi
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कुछ न कुछ बोलते रहो हम सेे चुप रहोगे तो लोग सुन लेंगे
Fahmi Badayuni
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समुंदर जैसी आँखें उस की देखीं जब हमें क्यूँ दी है बीनाई समझ आई
AKASH
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तेरी यादों से भर जाती हैं आँखें मगर ये मन नहीं भरता हमारा
AKASH
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काशी का'बा एक तरफ़ तेरा कूचा एक तरफ़ एक तरफ़ दारू वारु तेरा बोसा एक तरफ़
AKASH
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कोई कहता नहीं बुरा उस को मानते हैं सभी ख़ुदा उस को
AKASH
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नयन में आप के जीवन बिताना है मुझे स्पेस स्टेशन बनाना है
AKASH
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