लड़की है वो उस घर की जो मरते हैं दस्तार की ख़ातिर
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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समुंदर जैसी आँखें उस की देखीं जब हमें क्यूँ दी है बीनाई समझ आई
AKASH
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सब्ज़ रहता है पानी के बिन कुछ दिनों पेड़ इक दम से तो सूख जाता नहीं
AKASH
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तेरी यादों से भर जाती हैं आँखें मगर ये मन नहीं भरता हमारा
AKASH
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काशी का'बा एक तरफ़ तेरा कूचा एक तरफ़ एक तरफ़ दारू वारु तेरा बोसा एक तरफ़
AKASH
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आप की कोई निशानी भी नहीं है कम हमारी ज़िंदगानी भी नहीं है कोई समझे काश दरिया की उदासी शांत रहता है रवानी भी नहीं है आग बढ़ती जा रही है दिल मकाँ में देखना है बस बुझानी भी नहीं है बात मैं ने माननी दिल की नहीं है अब मुझे अपनी चलानी भी नहीं है
AKASH
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