आशिक़ का ख़त है पढ़ना ज़रा देख-भाल के काग़ज़ पे रख दिया है कलेजा निकाल के
sherKuch Alfaaz
LALA RAKHA RAM BARQ31 Likes
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तेरी ख़ता नहीं जो तू ग़ुस्से में आ गया पैसे का ज़ो'म था तेरे लहजे में आ गया सिक्का उछालकर के तेरे पास क्या बचा तेरा ग़ुरूर तो मेरे काँसे में आ गया
Mehshar Afridi
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चल गया होगा पता ये आप को बे-वफ़ा कहते हैं लड़के आप को इक ज़रा से हुस्न पर इतनी अकड़ तू समझती क्या है अपने आप को
Kushal Dauneria
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चाँद सा मिस्रा अकेला है मिरे काग़ज़ पर छत पे आ जाओ मिरा शे'र मुकम्मल कर दो
Bashir Badr
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इतना धीरे-धीरे रिश्ता ख़त्म हुआ बहुत दिनों तक लगा नहीं हम बिछड़े हैं
Ajmal Siddiqui
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बता रहा है झटकना तेरी कलाई का ज़रा भी रंज नहीं है तुझे जुदाई का मैं ज़िंदगी को खुले दिल से खर्च करता था हिसाब देना पड़ा मुझ को पाई-पाई का
Azhar Faragh
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