बता रहा है झटकना तेरी कलाई का ज़रा भी रंज नहीं है तुझे जुदाई का मैं ज़िंदगी को खुले दिल से खर्च करता था हिसाब देना पड़ा मुझ को पाई-पाई का
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चाँदी सोना एक तरफ़ तेरा होना एक तरफ़ एक तरफ़ तेरी आँखें जादू टोना एक तरफ़
Gyan Prakash Akul
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
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न भी चमके तो कोई बात नहीं तू तो वैसे ही सितारा है मुझे
Azhar Faragh
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ये नहीं देखते कितनी है रियाज़त किस की लोग आसान समझ लेते हैं आसानी को
Azhar Faragh
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मेरे बस में नहीं इलाज उस का ज़ख़्म देखा है मैं ने आज उस का जितना आगे का आदमी है वो रद न कर दे उसे समाज उस का
Azhar Faragh
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उसे कहो जो बुलाता है गहरे पानी में किनारे से बँधी कश्ती का मसअला समझे
Azhar Faragh
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वो जो इक शख़्स मुझे ताना-ए-जाँ देता है मरने लगता हूँ तो मरने भी कहाँ देता है तेरी शर्तों पे ही करना है अगर तुझ को क़ुबूल ये सहूलत तो मुझे सारा जहाँ देता है
Azhar Faragh
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