आती तो है यार मगर हरदम नईं आती है बातें करना तो मुझ को भी कम नईं आती है पर छोड़ो मेरी हालत को तुम क्या समझोगे गर मैं ताश भी खेलूँ तो बेगम नईं आती है
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बात करो रूठे यारों से सन्नाटों से डर जाते हैं प्यार अकेला जी लेता है दोस्त अकेले मर जाते हैं
Kumar Vishwas
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प्यार दो बार थोड़ी होता है हो तो फिर प्यार थोड़ी होता है यही बेहतर है तुम उसे रोको मुझ सेे इनकार थोड़ी होता है
Zubair Ali Tabish
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वो नहीं मेरा मगर उस से मोहब्बत है तो है ये अगर रस्मों रिवाजों से बग़ावत है तो है
Deepti Mishra
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सौ सौ उमीदें बँधती है इक इक निगाह पर मुझ को न ऐसे प्यार से देखा करे कोई
Allama Iqbal
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ये शहर-ए-अजनबी में अब किसे जा कर बताएँ हम कहाँ के रहने वाले हैं कहाँ की याद आती है
Ashu Mishra
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यार पूरा कैसे मेरा प्यार होता प्यार का तो नाम ही पूरा नहीं है
Vijay Potter Singhadiya
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तोड़ देगी वो भरोसा, फिर करूँँगा मैं यक़ीं ख़ैर! मैं तो जानता भी हूँ कि दुनिया गोल है
Vijay Potter Singhadiya
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सब कहते हैं काला अच्छा नइं होता लेकिन तुम ने उस का काजल देखा है
Vijay Potter Singhadiya
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फ़न आता तो सिखला देता इस में मेरा क्या जाता है मैं ने तो बस इश्क़ किया था मुझ को फ़न-वन नइँ आता है उस को तो अब भी ये लगता है उस ने छोड़ा है मुझ को कोई उसे समझाओ शे'र कभी भी घास नहीं खाता है
Vijay Potter Singhadiya
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मौक़ा मिल जाए तो ज़ोन नहीं मिलता डूबोगे, उल्फ़त में लोन नहीं मिलता ये लड़कियों का एक बहाना होता है माँ घर पे रहती है फोन नहीं मिलता
Vijay Potter Singhadiya
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