अब तो बीमार-ए-मोहब्बत तेरे क़ाबिल-ए-ग़ौर हुए जाते हैं
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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कोई इतना प्यारा कैसे हो सकता है फिर सारे का सारा कैसे हो सकता है तुझ सेे जब मिल कर भी उदासी कम नहीं होती तेरे बग़ैर गुज़ारा कैसे हो सकता है
Jawwad Sheikh
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मत पूछ कि क्या हाल है मेरा तेरे पीछे तू देख कि क्या रंग है तेरा, मेरे आगे
Mirza Ghalib
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वा'दा झूटा कर लिया चलिए तसल्ली हो गई है ज़रा सी बात ख़ुश करना दिल-ए-नाशाद का
Dagh Dehlvi
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ना-उमीदी बढ़ गई है इस क़दर आरज़ू की आरज़ू होने लगी
Dagh Dehlvi
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ख़ुदा रक्खे मोहब्बत ने किए आबाद दोनों घर मैं उन के दिल में रहता हूँ वो मेरे दिल में रहते हैं
Dagh Dehlvi
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जब आँखों में लगाता हूँ तो चुपके-चुपके हंस-हंसकर तेरी तस्वीर भी कहती है, सूरत ऐसी होती है
Dagh Dehlvi
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हाथ रख कर जो वो पूछे दिल-ए-बेताब का हाल हो भी आराम तो कह दूँ मुझे आराम नहीं
Dagh Dehlvi
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