अब तो उस सूने माथे पर कोरेपन की चादर है अम्मा जी की सारी सजधज, सब ज़ेवर थे बाबूजी कभी बड़ा सा हाथ ख़र्च थे कभी हथेली की सूजन मेरे मन का आधा साहस, आधा डर थे बाबूजी
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मौत ने सारी रात हमारी नब्ज़ टटोली ऐसा मरने का माहौल बनाया हम ने घर से निकले चौक गए फिर पार्क में बैठे तन्हाई को जगह-जगह बिखराया हम ने
Shariq Kaifi
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बेनतीजा रह गईं दिल्ली में सारी बैठकें अन्नदाता खेत की मेड़ों पे भूखे मर गए
Siraj Faisal Khan
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हम मेहनतकश इस दुनिया से जब अपना हिस्सा माँगेंगे इक बाग़ नहीं, इक खेत नहीं, हम सारी दुनिया माँगेंगे
Faiz Ahmad Faiz
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गर कोई मुझ सेे आ कर कहता, यार उदासी है मैं उस को गले लगाकर कहता, यार उदासी है होता दरवेश अगर मैं तो फिर सारी दो-पहरी गलियों में सदा लगाकर कहता, यार उदासी है
Siddharth Saaz
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यार जबसे छोड़कर मुझ को गया है सारी दुनिया को जलाना चाहता हूँ
Amaan Pathan
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पिछले बरस भी हम ने कलाई सजाई थी राखी के धागे आज भी कच्चे नहीं पड़े
Aalok Shrivastav
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नज़दीकी अक्सर दूरी का कारन भी बन जाती है सोच-समझ कर घुलना-मिलना अपने रिश्ते-दारों में
Aalok Shrivastav
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अब तो ख़ुद अपने ख़ून ने भी साफ़ कह दिया मैं आप का रहूॅंगा मगर उम्र भर नहीं
Aalok Shrivastav
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घर में झीने रिश्ते मैं ने लाखों बार उधड़ते देखे चुपके चुपके कर देती है जाने कब तुरपाई अम्मा
Aalok Shrivastav
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यही तो एक तमन्ना है इस मुसाफ़िर की जो तुम नहीं तो सफ़र में तुम्हारा प्यार चले
Aalok Shrivastav
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