अगर तेरा महबूब रूठा हुआ है तो आ पास मेरे अजब इक दवा है
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मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी
Ismail Raaz
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ख़ुद से भी मिल न सको, इतने पास मत होना इश्क़ तो करना, मगर देवदास मत होना देखना, चाहना, फिर माँगना, या खो देना ये सारे खेल हैं, इन में उदास मत होना
Kumar Vishwas
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आदमी देश छोड़े तो छोड़े 'अली' दिल में बसता हुआ घर नहीं छोड़ता एक मैं हूँ कि नींदें नहीं आ रही एक तू है कि बिस्तर नहीं छोड़ता
Ali Zaryoun
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तेरा बनता था कि तू दुश्मन हो अपने हाथों से खिलाया था तुझे तेरी गाली से मुझे याद आया कितने तानों से बचाया था तुझे
Ali Zaryoun
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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पहले जैसे मिरे हालात से डरता हूँ मैं अब मुहब्बत की तो हर बात से डरता हूँ मैं
Atif khan
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मेरे हालात क्यूँ न समझा वो मेरे जज़्बात क्यूँ न समझा वो मैं मुहब्बत नहीं दिखाता हूँ इतनी सी बात क्यूँ न समझा वो
Atif khan
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लो अब याद आने लगा वो समा जब किसी ने कहा था मुझे सब पता है
Atif khan
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यार तुम भी कमाल करते हो फिर बुरा मेरा हाल करते हो वक़्त पर ख़ुद कभी नहीं मिलते और मुझ से मलाल करते हो
Atif khan
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आज अंजान वो राहें थीं फैली जिन में कभी बाँहें थीं
Atif khan
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