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अगर ये आख़री है ईद तो ख़ुदा मुझ को गले लगाए वो और ईद ये मुबारक हो

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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी

Ali Zaryoun

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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा

Santosh S Singh

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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है

Tehzeeb Hafi

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तू किसी और ही दुनिया में मिली थी मुझ सेे तू किसी और ही मौसम की महक लाई थी डर रहा था कि कहीं ज़ख़्म न भर जाएँ मेरे और तू मुट्ठियाँ भर-भर के नमक लाई थी

Tehzeeb Hafi

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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया

Tehzeeb Hafi

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दुआएँ देता है पर मसअले का हल नहीं करता मैं और करता भी क्या ख़ुद को अगर पागल नहीं करता मोहब्बत भी नहीं मिलती न दिल ये टूटता ही है ख़ुदा मुझ को किसी भी काम में अव्वल नहीं करता

Kumar gyaneshwar

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कोई इस दर्जा न हो आसान मुझ पर यूँँ लगे अब हो रहा एहसान मुझ पर एक रिश्ता एक वा'दा एक लड़की बस हुआ इतनों का ही नुक़्सान मुझ पर

Kumar gyaneshwar

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देखो इतना भी ये आसान नहीं होता है ग़म हो तो कौन परेशान नहीं होता है इश्क़ में ख़ुद-कुशी करने जा रहे ऐ लड़के तुम तो कहते थे कि नुक़सान नहीं होता है

Kumar gyaneshwar

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ये मैं ने कब कहा कि बस मुझी से राब्ता रहे अगर जो कुछ नहीं है तो मिरी जाँ फ़ासला रहे तेरे दिए हुए वो सारे फूल सूख जाने हैं तेरा दिया हुआ ये ज़ख़्म तो हरा भरा रहे

Kumar gyaneshwar

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वफ़ा की बात पर इतनी शिकायत कौन करता है न जाने इन गुलाबों से मोहब्बत कौन करता है हमारे साथ रह कर तुम भी इतना सीख जाओगे पुरानी याद की आख़िर हिफाज़त कौन करता है।

Kumar gyaneshwar

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