sherKuch Alfaaz

ये मैं ने कब कहा कि बस मुझी से राब्ता रहे अगर जो कुछ नहीं है तो मिरी जाँ फ़ासला रहे तेरे दिए हुए वो सारे फूल सूख जाने हैं तेरा दिया हुआ ये ज़ख़्म तो हरा भरा रहे

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देखो इतना भी ये आसान नहीं होता है ग़म हो तो कौन परेशान नहीं होता है इश्क़ में ख़ुद-कुशी करने जा रहे ऐ लड़के तुम तो कहते थे कि नुक़सान नहीं होता है

Kumar gyaneshwar

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दुआएँ देता है पर मसअले का हल नहीं करता मैं और करता भी क्या ख़ुद को अगर पागल नहीं करता मोहब्बत भी नहीं मिलती न दिल ये टूटता ही है ख़ुदा मुझ को किसी भी काम में अव्वल नहीं करता

Kumar gyaneshwar

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कोई इस दर्जा न हो आसान मुझ पर यूँँ लगे अब हो रहा एहसान मुझ पर एक रिश्ता एक वा'दा एक लड़की बस हुआ इतनों का ही नुक़्सान मुझ पर

Kumar gyaneshwar

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अगर ये आख़री है ईद तो ख़ुदा मुझ को गले लगाए वो और ईद ये मुबारक हो

Kumar gyaneshwar

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वफ़ा की बात पर इतनी शिकायत कौन करता है न जाने इन गुलाबों से मोहब्बत कौन करता है हमारे साथ रह कर तुम भी इतना सीख जाओगे पुरानी याद की आख़िर हिफाज़त कौन करता है।

Kumar gyaneshwar

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