sherKuch Alfaaz

ऐ 'ज़ौक़' देख दुख़्तर-ए-रज़ को न मुँह लगा छुटती नहीं है मुँह से ये काफ़र लगी हुई इस शेर में शायर ने शराब की लत से बचने की सलाह दी है। शराब को 'दुख़्तर-ए-रज़' और 'काफ़िर' कहकर पुकारा गया है, जिसका मतलब है कि यह एक ऐसी जालिम चीज़ है जो अगर एक बार आदत बन जाए तो छूटती नहीं है। इसमें नशे की बुराई और उसकी मज़बूत पकड़ को दर्शाया गया है।

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