ऐसी ग़रीबी देखी है बिन सब्ज़ी रोटी खाई है और क्या बुरा हो सकता है हम ने ग़ज़ल तक बेची है
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कौन सी बात है तुम में ऐसी इतने अच्छे क्यूँँ लगते हो
Mohsin Naqvi
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उस सेे कहो इक बार मेरा नाम पुकारे उस के बिना साँसों का रिदम टूट रहा है
Ankit Maurya
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बात ऐसी भी भला आप में क्या रक्खी है इक दिवाने ने ज़मीं सर पे उठा रक्खी है इत्तिफ़ाक़न कहीं मिल जाए तो कहना उस सेे तेरे शाइ'र ने बड़ी धूम मचा रक्खी है
Ismail Raaz
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ऐसे हँस हँस के न देखा करो सब की जानिब लोग ऐसी ही अदाओं पे फ़िदा होते हैं
Majrooh Sultanpuri
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उस लड़की से बस अब इतना रिश्ता है मिल जाए तो बात वगैरा करती है बारिश मेरे रब की ऐसी नेमत है रोने में आसानी पैदा करती है
Tehzeeb Hafi
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रस्सी चाक़ू कहते मुझ को अक्सर बेहतर होगा ग़लत क़दम उट्ठा ले
Jagveer Singh
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ता'रीफ़ किसे तो किसे तनक़ीद मुबारक सब को सभी की आख़िरी उम्मीद मुबारक देरी से सही जान निकल तो गया है चाँद ऐ चाँद के टुकड़े तुझे ये ईद मुबारक
Jagveer Singh
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वही हुआ है जो होना तय था जो तय है आगे वही होना ये मसअला क्यूँँ भला जो तय है वही हुआ उस पे क्या रोना अगर है बस में जो सब ख़ुदा के तो उस के बंदों तुम्हें क्या फ़िक्र हैं रिंद हम होना है जो भी गर हमारा हम से ही वो होना
Jagveer Singh
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तेरी इक झलक से मेरा दिन बने है अहिल्या को बस राम का लम्स काफ़ी
Jagveer Singh
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मज़हब पर आ जाए बात तो बस्ती जलती है रेप अगर हो तो सिर्फ़ मोमबत्ती जलती है
Jagveer Singh
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