ता'रीफ़ किसे तो किसे तनक़ीद मुबारक सब को सभी की आख़िरी उम्मीद मुबारक देरी से सही जान निकल तो गया है चाँद ऐ चाँद के टुकड़े तुझे ये ईद मुबारक
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साल के आख़िरी दिन उस ने दिया वक़्त हमें अब तो ये साल कई साल नहीं गुज़रेगा
Shariq Kaifi
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धूप में कौन किसे याद किया करता है पर तिरे शहर में बरसात तो होती होगी
Ameer Imam
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इसी से जान गया मैं कि बख़्त ढलने लगे मैं थक के छाँव में बैठा तो पेड़ चलने लगे मैं दे रहा था सहारे तो इक हुजूम में था जो गिर पड़ा तो सभी रास्ता बदलने लगे
Farhat Abbas Shah
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सफ़र में धूप तो होगी जो चल सको तो चलो सभी हैं भीड़ में तुम भी निकल सको तो चलो
Nida Fazli
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निगाह-ए-शोख़ का क़ैदी नहीं है कौन यहाँ किसे तमन्ना नहीं फूल चूमने को मिले
Aks samastipuri
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मज़हब पर आ जाए बात तो बस्ती जलती है रेप अगर हो तो सिर्फ़ मोमबत्ती जलती है
Jagveer Singh
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ज़बरदस्ती पकड़े हुए हैं तू और मैं कि चल छोड़ देते हैं अब ये मोहब्बत
Jagveer Singh
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उठा कर पहलू से पाँव में बैठा दो कहेंगे तो वही जो कहना है हम को
Jagveer Singh
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ज़मीन पर मनुष्य को ही ख़तरा है मनुष्य से यहाँ-वहाँ मनुष्य डरता फिरता है मनुष्य से ख़ुदा ने भूक और मनुष्य ने बनाया इश्क़ को ख़ुदा का काम ज़्यादा जानलेवा है मनुष्य से
Jagveer Singh
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तेरी इक झलक से मेरा दिन बने है अहिल्या को बस राम का लम्स काफ़ी
Jagveer Singh
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