अँधेरों का न रह जाए कहीं नाम-ओ-निशाँ बाक़ी चलो आओ कि हम मिल कर मनाएँ ऐसे दीवाली
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उस की जुल्फ़ें उदास हो जाए इस-क़दर रौशनी भी ठीक नहीं तुम ने नाराज़ होना छोड़ दिया इतनी नाराज़गी भी ठीक नहीं
Fahmi Badayuni
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मैं अगर अपनी जवानी के सुना दूँ क़िस्से ये जो लौंडे हैं मेरे पाँव दबाने लग जाए
Mehshar Afridi
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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मत बताना कि बिखर जाएँ तो क्या होता है नईं नस्लों को नए ख़्वाब सजाने देना
Ameer Imam
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मुझ ऐसा शख़्स अगर क़हक़हों से भर जाए ये साँस लेती उदासी तो घुट के मर जाए वो मेरे बा'द तरस जाएगा मोहब्बत को उसे ये कहना अगर हो सके तो मर जाए
Rakib Mukhtar
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ये तो इक रस्म-ए-नुमाइश है अदा करता हूँ कौन कमबख़्त है ख़ुश अहद-ए-जुदाई कर के
YAWAR ALI
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देर तक मैं तुझे सीने से लगाए रक्खूँ कोई इस वक़्त की रफ़्तार को धीमा कर दे
YAWAR ALI
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तुझे मैं भूल तो जाऊँ मगर ये भी बता कैसे हर इक एहसास ज़िंदा है हर इक अरमान बाक़ी है
YAWAR ALI
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अब वो ही दिवानों सा मुझे ढूँढ़ रहा है हँसता था कभी जो मुझे दीवाना समझ कर
YAWAR ALI
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क़लम हाथों में लकड़ी का कलर तन पे सियाही के न जाने खो गए जा कर कहाँ दिन बादशाही के
YAWAR ALI
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