अँधेरों में भले ही साथ छोड़ा था हमारा मगर जब रौशनी लौटी तो साए लौट आए
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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दरगाहों पर चढ़ने हैं या मंदिर में फूल नहीं खिलते हैं इस तैयारी से
Vikas Sahaj
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मैं तेरे पास वापस आ रहा हूँ दुबारा भेजना मत इस धरा पर
Vikas Sahaj
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लोग खाते हैं तरस मुझ पे तो हैरत कैसी अपनी हालत पे मुझे ख़ुद भी तरस आता है
Vikas Sahaj
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उस की निगाह-ए-नाज़ से आगे निकल गए या'नी फ़रेब-साज़ से आगे निकल गए हम से भी रोक लेने की ज़हमत नहीं हुई तुम भी हर इक लिहाज़ से आगे निकल गए
Vikas Sahaj
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किसी उम्मीद के मारे हुए हैं अमाँ हम इश्क़ में हारे हुए हैं अभी मुझ सेे उन्हें कुछ काम होगा नहीं तो हम किसे प्यारे हुए हैं
Vikas Sahaj
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