दरगाहों पर चढ़ने हैं या मंदिर में फूल नहीं खिलते हैं इस तैयारी से
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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उस की निगाह-ए-नाज़ से आगे निकल गए या'नी फ़रेब-साज़ से आगे निकल गए हम से भी रोक लेने की ज़हमत नहीं हुई तुम भी हर इक लिहाज़ से आगे निकल गए
Vikas Sahaj
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दुनिया मुझ को पागल करने वाली थी फिर मैं ने कुछ शे'र कहे और बच निकला
Vikas Sahaj
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मरने वाले को कब ये मालूम हुआ है पीछे मंज़र कितना दुखदाई होता है
Vikas Sahaj
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मैं तेरे पास वापस आ रहा हूँ दुबारा भेजना मत इस धरा पर
Vikas Sahaj
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लोग खाते हैं तरस मुझ पे तो हैरत कैसी अपनी हालत पे मुझे ख़ुद भी तरस आता है
Vikas Sahaj
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