अँधियारों में चाँद अकेला होता है मतलब दुख में इंसाँ तन्हा होता है हाथों में वो पैसे ले कर बोली थी बोलो टूटे दिल का कितना होता है
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किसी गली में किराए पे घर लिया उस ने फिर उस गली में घरों के किराए बढ़ने लगे
Umair Najmi
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हुई मुद्दत कि 'ग़ालिब' मर गया पर याद आता है वो हर इक बात पर कहना कि यूँँ होता तो क्या होता
Mirza Ghalib
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क्यूँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा
Javed Akhtar
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी
Ismail Raaz
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मेरे आगे क़लम रखी थी और बंदूक़ें रक्खी थीं मैं ने इक दरवाज़ा खोला इक दरवाज़ा छोड़ दिया
Piyush Paiham
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मैं ही छोटा हूँ सभी से उम्र और पैसे में घर में बस यही ग़लती है मेरी सो सभी रूठे हैं मुझ सेे
Piyush Paiham
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जब भी तुझ पर ग़ुस्सा आया या फिर मुझ को प्यार आया मैं ने इक ख़त लिक्खा तुझ को और लिखकर के फाड़ दिया
Piyush Paiham
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लग गई है अब हमारी नौकरी भी मुश्किलें पर वैसी की वैसी ही हैं
Piyush Paiham
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दिल से बाहर ऐसे निकले रब ही जाने कैसे निकले तुम पर मैं ने यक़ीं किया था तुम भी सबके जैसे निकले
Piyush Paiham
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