लग गई है अब हमारी नौकरी भी मुश्किलें पर वैसी की वैसी ही हैं
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मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी
Ismail Raaz
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बात करो रूठे यारों से सन्नाटों से डर जाते हैं प्यार अकेला जी लेता है दोस्त अकेले मर जाते हैं
Kumar Vishwas
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अब उस की शादी का क़िस्सा न छेड़ो बस इतना कह दो कैसी लग रही थी
Zubair Ali Tabish
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मैं अगर अपनी जवानी के सुना दूँ क़िस्से ये जो लौंडे हैं मेरे पाँव दबाने लग जाए
Mehshar Afridi
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अब लगता है ठीक कहा था 'ग़ालिब' ने बढ़ते बढ़ते दर्द दवा हो जाता है
Madan Mohan Danish
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मैं ही छोटा हूँ सभी से उम्र और पैसे में घर में बस यही ग़लती है मेरी सो सभी रूठे हैं मुझ सेे
Piyush Paiham
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जब भी तुझ पर ग़ुस्सा आया या फिर मुझ को प्यार आया मैं ने इक ख़त लिक्खा तुझ को और लिखकर के फाड़ दिया
Piyush Paiham
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मेरे आगे क़लम रखी थी और बंदूक़ें रक्खी थीं मैं ने इक दरवाज़ा खोला इक दरवाज़ा छोड़ दिया
Piyush Paiham
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हम ने दुनिया को सुनाई थीं हमारी ख़्वाहिशें और फिर दुनिया हमारी जान लेने आ गई
Piyush Paiham
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आँख का काजल बनाए जाओगे पाँव की पायल बनाए जाओगे आप को भी उस ने अपना कह दिया आप भी पागल बनाए जाओगे
Piyush Paiham
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