अपनी मय्यत उठा नहीं सकता चार कंधों की अब ज़रूरत है
Related Sher
मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
388 likes
हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
333 likes
कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
354 likes
तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
339 likes
देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
300 likes
More from Afzal Sultanpuri
उन को लगता है सब तमाशा है वो मोहब्बत जो बे-तहाशा है
Afzal Sultanpuri
0 likes
ख़ुद के जो काम आ नहीं सकते मेरे क्या ख़ाक काम आएँगे
Afzal Sultanpuri
0 likes
नींद की अब गोलियाँ खाने लगे छोड़कर दुनिया को हम जाने लगे
Afzal Sultanpuri
1 likes
उन के आने का वक़्त हो गया है ईद मनाने का वक़्त हो गया है
Afzal Sultanpuri
2 likes
उन्हीं ख़्वाबों में जी लेना उन्हीं ख़्वाबों से डर जाना हमारे पास मत आना भले तुम यार मर जाना
Afzal Sultanpuri
2 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Afzal Sultanpuri.
Similar Moods
More moods that pair well with Afzal Sultanpuri's sher.







