उन्हीं ख़्वाबों में जी लेना उन्हीं ख़्वाबों से डर जाना हमारे पास मत आना भले तुम यार मर जाना
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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उन को लगता है सब तमाशा है वो मोहब्बत जो बे-तहाशा है
Afzal Sultanpuri
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नींद की अब गोलियाँ खाने लगे छोड़कर दुनिया को हम जाने लगे
Afzal Sultanpuri
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ख़्वाब मरते नहीं बिखर जाते तुम न मिलते तो यार मर जाते
Afzal Sultanpuri
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तुम मोहब्बत कि बात करते हो बात क्या वाहियात करते हो
Afzal Sultanpuri
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अपनी आँखों का नूर खो बैठे जो मिली थी वो हूर खो बैठे
Afzal Sultanpuri
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