asr ke waqt mere pas na baith mujh pe ek sanwli ka saya hai
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है ज़मीं पे बैठ के क्या आसमान देखता है
Shakeel Azmi
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कोई शहर था जिस की एक गली मेरी हर आहट पहचानती थी मेरे नाम का इक दरवाज़ा था इक खिड़की मुझ को जानती थी
Ali Zaryoun
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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अजल से ले कर अब तक औरतों को सिवाए जिस्म क्या समझा गया है
Ali Zaryoun
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तन्हा ही सही लड़ तो रही है वो अकेली बस थक के गिरी है अभी हारी तो नहीं है
Ali Zaryoun
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अस्र के वक़्त मेरे पास न बैठ मुझ पे इक साँवली का साया है
Ali Zaryoun
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मैं कुछ बता नहीं सकता वो मेरी क्या थी 'अली' कि उस को देख के बस अपनी याद आती थी
Ali Zaryoun
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जागना और जगा के सो जाना रात को दिन बना के सो जाना
Ali Zaryoun
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