बा'द-ए-शब-ए-विसाल से आगे की चीज़ है ये ज़िंदगी मलाल से आगे की चीज़ है क्या ही कहूँ ए दोस्त मैं उस के मिजाज़ का वो शख़्स तो कमाल से आगे की चीज़ है है प्यार मुझ को आप से कह तो सका नहीं ये तो मेरी मजाल से आगे की चीज़ है उस के रुमाल के सिवा तो कुछ है ही नहीं लेकिन वो भी रुमाल से आगे की चीज़ है
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परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है ज़मीं पे बैठ के क्या आसमान देखता है
Shakeel Azmi
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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जिन को जाना है इक दिन चले जाते हैं याद में उन की हम क्यूँ मरे जाते हैं
Aditya Kumar 'Chaudhary'
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थी यही और यही रहेगी भी ग़म मोहब्बत की राजधानी है
Aditya Kumar 'Chaudhary'
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मुझ को तेरी आह ने तबाह कर दिया खा गया मुझे तेरा लगाव चौधरी
Aditya Kumar 'Chaudhary'
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सो गए सारे आशिक़ बिलखते हुए खेल चलना था चलता रहा नियति का
Aditya Kumar 'Chaudhary'
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है ये दुख कि मैं तुझ सेे जुदा हो गया और सितम ये कि तुझ को मैं भूला नहीं
Aditya Kumar 'Chaudhary'
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