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सो गए सारे आशिक़ बिलखते हुए खेल चलना था चलता रहा नियति का

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रोने की तुझ को देख के आदत नहीं गई यादें गई हैं दिल से मुहब्बत नहीं गई

Aditya Kumar 'Chaudhary'

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बा'द-ए-शब-ए-विसाल से आगे की चीज़ है ये ज़िंदगी मलाल से आगे की चीज़ है क्या ही कहूँ ए दोस्त मैं उस के मिजाज़ का वो शख़्स तो कमाल से आगे की चीज़ है है प्यार मुझ को आप से कह तो सका नहीं ये तो मेरी मजाल से आगे की चीज़ है उस के रुमाल के सिवा तो कुछ है ही नहीं लेकिन वो भी रुमाल से आगे की चीज़ है

Aditya Kumar 'Chaudhary'

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किस ने इन खगों की बस्तियाँ उजाड़ी कौन शजरों को कपटी बना रहा है

Aditya Kumar 'Chaudhary'

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मुझ को तेरी आह ने तबाह कर दिया खा गया मुझे तेरा लगाव चौधरी

Aditya Kumar 'Chaudhary'

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उस को नज़रें न अपनी झुकानी पड़ें बस यही सोच कर उस को देखा नहीं

Aditya Kumar 'Chaudhary'

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