किस ने इन खगों की बस्तियाँ उजाड़ी कौन शजरों को कपटी बना रहा है
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था
Tehzeeb Hafi
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तू किसी और ही दुनिया में मिली थी मुझ सेे तू किसी और ही मौसम की महक लाई थी डर रहा था कि कहीं ज़ख़्म न भर जाएँ मेरे और तू मुट्ठियाँ भर-भर के नमक लाई थी
Tehzeeb Hafi
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किस लिए देखती हो आईना तुम तो ख़ुद से भी ख़ूब-सूरत हो
Jaun Elia
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लोग सुन कर वाह-वाही करते हैं हर बार ही रोज़ ही रोता हूँ अब तो मैं किसी सुर-ताल में
nakul kumar
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मुझ को तेरी आह ने तबाह कर दिया खा गया मुझे तेरा लगाव चौधरी
Aditya Kumar 'Chaudhary'
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सो गए सारे आशिक़ बिलखते हुए खेल चलना था चलता रहा नियति का
Aditya Kumar 'Chaudhary'
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मिल के आया हूँ मैं उस सेे इस दफ़ा हाँ भूला तो नहीं है पर बदल गया है
Aditya Kumar 'Chaudhary'
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रोने की तुझ को देख के आदत नहीं गई यादें गई हैं दिल से मुहब्बत नहीं गई
Aditya Kumar 'Chaudhary'
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जिन को जाना है इक दिन चले जाते हैं याद में उन की हम क्यूँ मरे जाते हैं
Aditya Kumar 'Chaudhary'
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