थी यही और यही रहेगी भी ग़म मोहब्बत की राजधानी है
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वो लड़ कर भी सो जाए तो उस का माथा चूमूँ मैं उस से मोहब्बत एक तरफ़ है उस से झगड़ा एक तरफ़
Varun Anand
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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तू किसी और ही दुनिया में मिली थी मुझ सेे तू किसी और ही मौसम की महक लाई थी डर रहा था कि कहीं ज़ख़्म न भर जाएँ मेरे और तू मुट्ठियाँ भर-भर के नमक लाई थी
Tehzeeb Hafi
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कोई शहर था जिस की एक गली मेरी हर आहट पहचानती थी मेरे नाम का इक दरवाज़ा था इक खिड़की मुझ को जानती थी
Ali Zaryoun
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भरम रखा है तेरे हिज्र का वरना क्या होता है मैं रोने पे आ जाऊँ तो झरना क्या होता है मेरा छोड़ो मैं नइँ थकता मेरा काम यही है लेकिन तुम ने इतने प्यार का करना क्या होता है
Tehzeeb Hafi
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मुझ को तेरी आह ने तबाह कर दिया खा गया मुझे तेरा लगाव चौधरी
Aditya Kumar 'Chaudhary'
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सो गए सारे आशिक़ बिलखते हुए खेल चलना था चलता रहा नियति का
Aditya Kumar 'Chaudhary'
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रोने की तुझ को देख के आदत नहीं गई यादें गई हैं दिल से मुहब्बत नहीं गई
Aditya Kumar 'Chaudhary'
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किस ने इन खगों की बस्तियाँ उजाड़ी कौन शजरों को कपटी बना रहा है
Aditya Kumar 'Chaudhary'
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जिन को जाना है इक दिन चले जाते हैं याद में उन की हम क्यूँ मरे जाते हैं
Aditya Kumar 'Chaudhary'
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