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बच्चे सिखला देते हैं हम को तर्ज़ मुहब्बत के कैसे कट्टी कर के फ़ौरन बट्टी कर लेते हैं

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मेरे होंठों पे उस के नाम का हर पल तराना है वो दीवाना समझता है वही केवल दिवाना है उसे मैं, मुझ को वो सारी कमी के साथ है मंज़ूर मुहब्बत के दयारों में यही अपना फ़साना है

Bhoomi Srivastava

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मेरी सच्चाई अब तो राएगाँ ही है उसे कुछ वसवसों ने छीना है मुझ से

Bhoomi Srivastava

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बिन नौकरी सपने सजाए अच्छा थोड़ी लगता है बेटी के होते माँ कमाए अच्छा थोड़ी लगता है मिलती है इक ही ज़िंदगी मुश्किल से तो यारों यहाँ उस को भी रो धो के बिताए अच्छा थोड़ी लगता है

Bhoomi Srivastava

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मेरे दिल तुझ को वाजिब मशवरा इक दे रही हूँ मैं तअल्लुक़ सब सेे रखना पर निभाना मत किसी से भी

Bhoomi Srivastava

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वो ज़मीं पर मेरे साथ हो पास हो इस लिए मैं नहीं चाहती वो कभी ईद का चाँद हो

Bhoomi Srivastava

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