बढ़ता रहा बदन में मिरे शोर ज़ख़्म का मुझ सेे बदन का बच्चा सँभाला नहीं गया
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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उम्र भर सामने नज़रो के उसे रखना था मैं ने उस चाँद की तस्वीर पे आँखें रख दी
Lokesh Singh
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ज़ीस्त में जब भी कभी घबरा गया आप की मौजूदगी महसूस की
Lokesh Singh
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जिस्म है ज़ख़्म से भरा पूरा उम्र भर का हिसाब हो जैसे
Lokesh Singh
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तरसते है यहाँ पर सब ख़ुशी को किसी से अब नहीं शिकवा किसी को
Lokesh Singh
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जलता रहा चराग़ बयाबान में जहाँ हम भी चले गए वहाँ पर बेबसी के साथ
Lokesh Singh
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