तरसते है यहाँ पर सब ख़ुशी को किसी से अब नहीं शिकवा किसी को
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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ज़ीस्त में जब भी कभी घबरा गया आप की मौजूदगी महसूस की
Lokesh Singh
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उम्र भर सामने नज़रो के उसे रखना था मैं ने उस चाँद की तस्वीर पे आँखें रख दी
Lokesh Singh
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सताती बहुत है बदन की उदासी यहाँ कौन रोता है अपनी ख़ुशी से
Lokesh Singh
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जलता रहा चराग़ बयाबान में जहाँ हम भी चले गए वहाँ पर बेबसी के साथ
Lokesh Singh
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पास रख सँभाल कर मेरे अदू इस तीर को रख लिया है बाँध कर मैं ने बदन से पीर को
Lokesh Singh
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