बनाने वालों ने इक बार ढाला छत मेरी माँ रोज़ उठ कर घर बनाती है माँ दर्जा ईश्वर का राम को देती मेरे कान्हा को भी सुंदर बनाती है
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एक दिन की ख़ुराक है मेरी आप के हैं जो पूरे साल के दुख
Varun Anand
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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लोग सुन कर वाह-वाही करते हैं हर बार ही रोज़ ही रोता हूँ अब तो मैं किसी सुर-ताल में
nakul kumar
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मेरी दुनिया उजड़ गई इस में तुम इसे हादसा समझते हो आख़िरी रास्ता तो बाक़ी है आख़िरी रास्ता समझते हो
Himanshi babra KATIB
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शतक बनाने को बस एक रन बनाना है वो दोस्त बन गई है अब दुल्हन बनाना है
Charagh Sharma
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मिरे दिल में रहता किताबों का कोना के लम्हात में गुम हिसाबों का कोना आ जाओ कभी तुम सवालात बन कर बचा के रखा है जवाबों का कोना
SIDDHARTH SHARMA
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उस ने अब तक वो चूड़ी उतारी नहीं या'नी खो बैठी है मुझ को हारी नहीं इक दो दो वज़्न है बस मोहब्बत का यार पूरी दुनिया मगर इस से भारी नहीं
SIDDHARTH SHARMA
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तेरा होना नहीं भरता जरा भी रौनकें मुझ में तेरा जाना भी मुझ को यार अब तन्हा नहीं करता ये मेरी है मुहब्बत मैं अकेला कर भी सकता हूँ तेरा मौजूद होना इस को अब दूना नहीं करता
SIDDHARTH SHARMA
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आसमाँ के टूटते तारो से मत मांगो मुरादे हौसला दो तुम उसे वो झिलमिलाना हारा होगा
SIDDHARTH SHARMA
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तू मुझ को देख तेरे शहर में घर है मोहब्बत का जो रोता है नहीं उस को मगर तू याद आती है तू मुझ सेे डर हाँ सच में डर मैं तेरा नाम ले दूँगा मोहब्बत है नहीं तो तू ग़ज़ल के बा'द आती है
SIDDHARTH SHARMA
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