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मिरे दिल में रहता किताबों का कोना के लम्हात में गुम हिसाबों का कोना आ जाओ कभी तुम सवालात बन कर बचा के रखा है जवाबों का कोना

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उस ने अब तक वो चूड़ी उतारी नहीं या'नी खो बैठी है मुझ को हारी नहीं इक दो दो वज़्न है बस मोहब्बत का यार पूरी दुनिया मगर इस से भारी नहीं

SIDDHARTH SHARMA

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तू मुझ को देख तेरे शहर में घर है मोहब्बत का जो रोता है नहीं उस को मगर तू याद आती है तू मुझ सेे डर हाँ सच में डर मैं तेरा नाम ले दूँगा मोहब्बत है नहीं तो तू ग़ज़ल के बा'द आती है

SIDDHARTH SHARMA

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जब कभी मैं कहता ख़ुद को फ़ुजू़ल है लड़की डाँट कर माँ कहती सुन एक फूल है लड़की चूम कर वो आयत बोली लगाओ रामायण मैं भी जा के मंदिर बोला क़ुबूल है लड़की

SIDDHARTH SHARMA

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तेरा होना नहीं भरता जरा भी रौनकें मुझ में तेरा जाना भी मुझ को यार अब तन्हा नहीं करता ये मेरी है मुहब्बत मैं अकेला कर भी सकता हूँ तेरा मौजूद होना इस को अब दूना नहीं करता

SIDDHARTH SHARMA

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मोहब्बत ने सिखाया है मोहब्बत वक़्त ज़ाया' है मगर ये दिल न जाने क्यूँ गुलाबें फिर ले आया है

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