sherKuch Alfaaz

तू मुझ को देख तेरे शहर में घर है मोहब्बत का जो रोता है नहीं उस को मगर तू याद आती है तू मुझ सेे डर हाँ सच में डर मैं तेरा नाम ले दूँगा मोहब्बत है नहीं तो तू ग़ज़ल के बा'द आती है

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मिरे दिल में रहता किताबों का कोना के लम्हात में गुम हिसाबों का कोना आ जाओ कभी तुम सवालात बन कर बचा के रखा है जवाबों का कोना

SIDDHARTH SHARMA

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उस ने अब तक वो चूड़ी उतारी नहीं या'नी खो बैठी है मुझ को हारी नहीं इक दो दो वज़्न है बस मोहब्बत का यार पूरी दुनिया मगर इस से भारी नहीं

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जब कभी मैं कहता ख़ुद को फ़ुजू़ल है लड़की डाँट कर माँ कहती सुन एक फूल है लड़की चूम कर वो आयत बोली लगाओ रामायण मैं भी जा के मंदिर बोला क़ुबूल है लड़की

SIDDHARTH SHARMA

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दिल के अंदर दुकान होता है जिस का बाहर मकान होता है दिल के इक हिस्से में मोहब्बत बस बाक़ी सब में जहान होता है

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हवाएँ चूम कर तुम ने चिराग़ों को जलाया है तेरी आवाज़ दस्तक है ख़ुदा ने घर बुलाया है

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