sherKuch Alfaaz

दिल के अंदर दुकान होता है जिस का बाहर मकान होता है दिल के इक हिस्से में मोहब्बत बस बाक़ी सब में जहान होता है

More from SIDDHARTH SHARMA

मिरे दिल में रहता किताबों का कोना के लम्हात में गुम हिसाबों का कोना आ जाओ कभी तुम सवालात बन कर बचा के रखा है जवाबों का कोना

SIDDHARTH SHARMA

1 likes

उस ने अब तक वो चूड़ी उतारी नहीं या'नी खो बैठी है मुझ को हारी नहीं इक दो दो वज़्न है बस मोहब्बत का यार पूरी दुनिया मगर इस से भारी नहीं

SIDDHARTH SHARMA

2 likes

तेरा होना नहीं भरता जरा भी रौनकें मुझ में तेरा जाना भी मुझ को यार अब तन्हा नहीं करता ये मेरी है मुहब्बत मैं अकेला कर भी सकता हूँ तेरा मौजूद होना इस को अब दूना नहीं करता

SIDDHARTH SHARMA

2 likes

हवाएँ चूम कर तुम ने चिराग़ों को जलाया है तेरी आवाज़ दस्तक है ख़ुदा ने घर बुलाया है

SIDDHARTH SHARMA

2 likes

पुरानी फ़ोटो उस की देखता हूँ मैं नई तस्वीर आँखों को रुलाती है वो मुझ को छोड़ कर ऐसे गई 'साहिर' माँ जैसे छोड़ कर बच्चे को जाती है

SIDDHARTH SHARMA

3 likes

Similar Writers

View All ›

Our suggestions based on SIDDHARTH SHARMA.

Similar Moods

View All ›

More moods that pair well with SIDDHARTH SHARMA's sher.