sherKuch Alfaaz

पुरानी फ़ोटो उस की देखता हूँ मैं नई तस्वीर आँखों को रुलाती है वो मुझ को छोड़ कर ऐसे गई 'साहिर' माँ जैसे छोड़ कर बच्चे को जाती है

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तेरा होना नहीं भरता जरा भी रौनकें मुझ में तेरा जाना भी मुझ को यार अब तन्हा नहीं करता ये मेरी है मुहब्बत मैं अकेला कर भी सकता हूँ तेरा मौजूद होना इस को अब दूना नहीं करता

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मोहब्बत ने सिखाया है मोहब्बत वक़्त ज़ाया' है मगर ये दिल न जाने क्यूँ गुलाबें फिर ले आया है

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मिरे दिल में रहता किताबों का कोना के लम्हात में गुम हिसाबों का कोना आ जाओ कभी तुम सवालात बन कर बचा के रखा है जवाबों का कोना

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तू मुझ को देख तेरे शहर में घर है मोहब्बत का जो रोता है नहीं उस को मगर तू याद आती है तू मुझ सेे डर हाँ सच में डर मैं तेरा नाम ले दूँगा मोहब्बत है नहीं तो तू ग़ज़ल के बा'द आती है

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बनाने वालों ने इक बार ढाला छत मेरी माँ रोज़ उठ कर घर बनाती है माँ दर्जा ईश्वर का राम को देती मेरे कान्हा को भी सुंदर बनाती है

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