पुरानी फ़ोटो उस की देखता हूँ मैं नई तस्वीर आँखों को रुलाती है वो मुझ को छोड़ कर ऐसे गई 'साहिर' माँ जैसे छोड़ कर बच्चे को जाती है
Related Sher
मैं क्या कहूँ के मुझे सब्र क्यूँँ नहीं आता मैं क्या करूँँ के तुझे देखने की आदत है
Ahmad Faraz
118 likes
परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है ज़मीं पे बैठ के क्या आसमान देखता है
Shakeel Azmi
283 likes
निगाहें फेर ली घबरा के मैं ने वो तुम से ख़ूब-सूरत लग रही थी
Fahmi Badayuni
123 likes
तुम पूछो और मैं न बताऊँ ऐसे तो हालात नहीं एक ज़रा सा दिल टूटा है और तो कोई बात नहीं
Qateel Shifai
125 likes
वो लड़ कर भी सो जाए तो उस का माथा चूमूँ मैं उस से मोहब्बत एक तरफ़ है उस से झगड़ा एक तरफ़
Varun Anand
264 likes
More from SIDDHARTH SHARMA
तेरा होना नहीं भरता जरा भी रौनकें मुझ में तेरा जाना भी मुझ को यार अब तन्हा नहीं करता ये मेरी है मुहब्बत मैं अकेला कर भी सकता हूँ तेरा मौजूद होना इस को अब दूना नहीं करता
SIDDHARTH SHARMA
2 likes
मोहब्बत ने सिखाया है मोहब्बत वक़्त ज़ाया' है मगर ये दिल न जाने क्यूँ गुलाबें फिर ले आया है
SIDDHARTH SHARMA
2 likes
मिरे दिल में रहता किताबों का कोना के लम्हात में गुम हिसाबों का कोना आ जाओ कभी तुम सवालात बन कर बचा के रखा है जवाबों का कोना
SIDDHARTH SHARMA
1 likes
तू मुझ को देख तेरे शहर में घर है मोहब्बत का जो रोता है नहीं उस को मगर तू याद आती है तू मुझ सेे डर हाँ सच में डर मैं तेरा नाम ले दूँगा मोहब्बत है नहीं तो तू ग़ज़ल के बा'द आती है
SIDDHARTH SHARMA
2 likes
बनाने वालों ने इक बार ढाला छत मेरी माँ रोज़ उठ कर घर बनाती है माँ दर्जा ईश्वर का राम को देती मेरे कान्हा को भी सुंदर बनाती है
SIDDHARTH SHARMA
2 likes
Similar Writers
Our suggestions based on SIDDHARTH SHARMA.
Similar Moods
More moods that pair well with SIDDHARTH SHARMA's sher.







