बरखा किए बग़ैर ही बादल चले गए गर्मी से फिर ज़मीन की चमड़ी उधड़ गई
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ये कभी मिलने चले आऍंगे सदियों बा'द भी वक़्त के पन्नों में कुछ लम्हात रख कर देखिए
nakul kumar
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कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता है मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है
Kumar Vishwas
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याराँ वो जो है मेरा मसीहा-ए-जान-ओ-दिल बे-हद अज़ीज़ है मुझे अच्छा किए बग़ैर मैं बिस्तर-ए-ख़याल पे लेटा हूँ उस के पास सुब्ह-ए-अज़ल से कोई तक़ाज़ा किए बग़ैर
Jaun Elia
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तुम सोच रहे हो बस, बादल की उड़ानों तक मेरी तो निगाहें हैं सूरज के ठिकानों तक
Aalok Shrivastav
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चेहरा धुँदला सा था और सुनहरे झुमके थे बादल ने कानों में चाँद के टुकड़े पहने थे इक दूजे को खोने से हम इतना डरते थे ग़ुस्सा भी होते तो बातें करते रहते थे
Vikram Gaur Vairagi
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ज़िन्दाबाद करो उस आशिक़ का जो ज़ंजीरों में भी हँस कर बोल रहा पायल की छम छम ज़िन्दाबाद रहे
Atul K Rai
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हम सेे पूछो हँसने की कीमत साहब, चुप्पी ओढ़े घण्टों रोना पड़ता है!
Atul K Rai
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कोई तो है चिढ़ाता है जो मुझ को मैं आईने में जब भी देखता हूँ
Atul K Rai
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सूरज के आते ही कैसे छँटने लगता है कोहरा आ जाओ तुम रस्ते से अवरोध स्वयं हट जाएँगे
Atul K Rai
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बुरा अच्छा लगा होगा उसे भी उसी के हाथ में अच्छा बुरा था
Atul K Rai
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