बे-वफ़ा है तो ये इक बात भी सुनती जा मेरी तुझ को इक शे'र ही काफ़ी है भुलाने के लिए
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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प्यास अगर मेरी बुझा दे तो मैं जानू वरना तू समुंदर है तो होगा मेरे किस काम का है
Rahat Indori
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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पहले सी दिल में हुस्न की चाहत नहीं बची देखा है हम ने हुस्न को इतने क़रीब से
Rakesh Mahadiuree
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शे'र मेरा सुन के अहल-ए-बज़्म तो ख़ामोश थी मेरे आगे लिखने वाले तब्सिरा करते रहे
Rakesh Mahadiuree
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जाइए ढूँढ़िए दुनिया में कहीं और वफ़ा मेरे दिल में तो ये सरकार नहीं रक्खा है
Rakesh Mahadiuree
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बे-वफ़ाई आदत है बे-हयाई फ़ितरत है मेरे जैसे आशिक़ हैं आशिक़ी पे लानत है
Rakesh Mahadiuree
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नक़्ल किए तो वक़्त में मारे जाओगे सब को अपनी फ़ितरत ज़िंदा रखती है
Rakesh Mahadiuree
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