bharwa dena mere kase ko mere kase ko bharwa dena
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अश'आर मिरे यूँँ तो ज़माने के लिए हैं कुछ शे'र फ़क़त उन को सुनाने के लिए हैं ये इल्म का सौदा ये रिसाले ये किताबें इक शख़्स की यादों को भुलाने के लिए हैं
Jaan Nisar Akhtar
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तुम्हें पता है मिरे हाथ की लकीरों में तुम्हारे नाम के सारे हुरूफ़ बनते हैं
Fareeha Naqvi
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तो क्या उस को मैं होंठों से बजाऊँ तिरे दर पे जो घंटी लग गई है चराग़ उस ने मिरे लौटा दिए हैं अब उस के घर में बिजली लग गई है
Fahmi Badayuni
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मत बताना कि बिखर जाएँ तो क्या होता है नईं नस्लों को नए ख़्वाब सजाने देना
Ameer Imam
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ये सोच के माँ बाप की ख़िदमत में लगा हूँ इस पेड़ का साया मिरे बच्चों को मिलेगा
Munawwar Rana
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वो पेड़ जिस की छाँव में कटी थी उम्र गाँव में मैं चूम चूम थक गया मगर ये दिल भरा नहीं
Hammad Niyazi
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मैं अपने बाप के सीने से फूल चुनता हूँ सो जब भी साँस थमी बाग़ में टहल आया
Hammad Niyazi
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सुब्ह सवेरे नंगे पाँव घास पे चलना ऐसा है जैसे बाप का पहला बोसा क़ुर्बत जैसे माँओं की
Hammad Niyazi
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आख़िरी बार मैं कब उस से मिला याद नहीं बस यही याद है इक शाम बहुत भारी थी
Hammad Niyazi
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