भटके तमाम उम्र हम आवारगान-ए-इश्क़ लेकिन किसी के दिल में ठिकाना नहीं मिला
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बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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हम ने उस को इतना देखा जितना देखा जा सकता था लेकिन फिर भी दो आँखों से कितना देखा जा सकता था
Farrukh Yar
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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गले मिलना न मिलना तो तेरी मर्ज़ी है लेकिन तेरे चेहरे से लगता है तेरा दिल कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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उस की चाहत में भी इख़लास नहीं था शायद और कुछ हम भी उसे दिल से नहीं चाह सके
Salman ashhadi sahil
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याद करने की सहूलत तो मुयस्सर थी मगर भूल जाना ही उसे मैं ने ज़रूरी समझा
Salman ashhadi sahil
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फिर यूँँ हुआ कि शहर की रौनक़ को छोड़कर हम ऐसे लोग गाँव की जानिब निकल पड़े
Salman ashhadi sahil
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आख़िर को मिरे हाल पे वो शख़्स भी रोया कहता था जो कुछ भी नहीं दर्द-ए-ग़म-ए-हिज्राँ
Salman ashhadi sahil
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हमारे शे'र को बस शे'र मत समझ लेना हम अपने दर्द को ख़ून-ए-जिगर से लिखते हैं
Salman ashhadi sahil
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